कुमाऊं मंडल के सबसे बड़े हॉस्पिटल सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के कर्मचारी हड़ताल पर हैं. ऐसे में सुशीला तिवारी हॉस्पिटल की तमाम स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं. सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में कार्यरत उपनल कर्मचारी तीन घंटे की हड़ताल कर रहे हैं. कर्मचारी की तरफ से साफ किया है कि यदि 20 अगस्त तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.
सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में कार्यरत करीब 600 उपनल कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बीते पांच महीने से वेतन नहीं मिला है, वो कई बार हॉस्पिटल प्रबंधन से लेकर स्वास्थ्य विभाग और सरकार तक अपनी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. इसीलिए उन्होंने तीन घंटे के कार्य बहिष्कार की निर्णय लिया है.
तीन घंटे धरने पर बैठे उपनल कर्मचारी: उपनल कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि 20 अगस्त तक वो रोजाना तीन घंटे की हड़ताल करेंगे. यदि 20 अगस्त तक उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वो अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर जाएंगे. सोमवार को दोपहर 12 बजे तक कर्मचारियों ने सुशीला तिवारी हॉस्पिटल के मुख्य गेट पर धरना दिया और नारेबाजी की.
कर्मचारियों को पांच माह से नहीं मिला वेतन: उपनल कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पांच माह से वेतन नहीं मिला है, जिसके चलते कर्मचारियों का घर चलाना मुश्किल हो गया है. बच्चों की स्कूल की फीस के साथ-साथ किराए में रहने वाले कर्मचारी अपने घरों का किराया भी नहीं दे पाए हैं.
कर्मचारियों का कहना है कि वो पिछले 15 से 20 सालों से सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज सरकार उनको निकालने की भी साजिश रच रही है. कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सरकार से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उनका वेतन दिया जाए.
सुशीला तिवारी हॉस्पिटल प्रबंधन का बयान: कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जल्द वेतन नहीं दिया गया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा. मामले में अस्पताल प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि कर्मचारियों को जल्द से जल्द वेतन दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं. सुशीला तिवारी अस्पताल में 600 से अधिक उपनल कर्मी अलग-अलग विभागों में कार्यरत हैं. उन्हें पिछले पांच माह से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है. वेतन को लेकर शासन स्तर पर कार्रवाई चल रही है. वहीं कर्मचारियों के तीन घंटे की हड़ताल मरीजों को भी खासी दिक्कत हो रही है.
