प्राकृतिक आपदा से नुकसान का सटीक आंकड़ा लेने के लिए केंद्रीय टीम उत्तराखंड पहुंच रही है. हालांकि इससे पहले राज्य ने अब तक हुए नुकसान का जो आंकड़ा जुटाया है, उसमें लोक निर्माण विभाग सबसे आगे दिख रहा है. विभाग की नुकसान को लेकर यह हिस्सेदारी मामूली नहीं है, बल्कि कुल नुकसान में 20% हिस्सा अकेले PWD (लोक निर्माण विभाग) का ही है.
उत्तराखंड में आपदा से हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेज दिया है. उधर केंद्र सरकार की भी एक टीम जल्द ही प्रदेश में आ रही है, ताकि नुकसान के सटीक आंकड़े को वह धरातल पर जाकर देख सके. हालांकि अभी हो रही लगातार बारिश के चलते नुकसान के इस आंकड़े में बढ़ोतरी हो रही है, फिलहाल फौरी तौर पर राज्य ने अपने आंकड़े जारी कर दिए हैं.
प्रदेश में लोक निर्माण विभाग ने अब तक भारी बारिश के कारण सड़कों और पुलों के नुकसान का जो आकलन किया है, उसके अनुसार राज्य में विभाग को करीब 1000 करोड़ का चूना लग चुका है. जबकि अब भी नुकसान होना जारी है. उधर कई जगहों पर भूस्खलन के बाद PWD की सड़कें खतरे की जद में हैं और पुलों को भी सुरक्षित रखने के लिए कई जगह ट्रीटमेंट की जरूरत है. इसके लिए भी PWD को 1200 करोड़ की आवश्यकता है. इस तरह लोक निर्माण विभाग को कुल 2200 करोड़ की जरूरत है.
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे बताते हैं कि फिलहाल लगातार मौसम खराब होने के कारण सड़कों को सही करने का काम तेज रफ्तार से नहीं हो पा रहा है. बावजूद इसके विभाग के अधिकारी जो भी काम सबसे जरूरी है, उन्हें पूरा करने में लगे हुए हैं.
सचिव पंकज कुमार पांडे के अनुसार कई जगह पर सड़के पूरी तरह से बह गई है. ऐसी सड़कों को भी बनाने में विभाग को समय लग रहा है. राज्य को अब तक करीब 5000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. इसके लिए विभिन्न जिलों से नुकसान का फौरी तौर पर आंकड़ा भेजा गया है.
आपदा प्रबंधन विभाग में भी जिलों से भेजे गए इन आंकड़ों के आधार पर नुकसान का लेखा-जोखा तैयार किया है. आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि भारत सरकार से एक टीम जल्द ही राज्य में आ रही है, जो की सटीक आंकड़े को मौके पर जाकर रिपोर्ट करेगी. फिलहाल जो आंकड़ा सामने आया है, उसके हिसाब से रिपोर्ट बनाई गई है, लेकिन ये आंकड़ा अंतिम नहीं है.
