उत्तराखंड में उपनल (UPNL) कर्मियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर है। कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है, जिससे समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण का रास्ता साफ हो गया है। सरकार को 2 महीने के भीतर पात्र कर्मचारियों का सत्यापन कर नया वेतन अनुबंध लागू करने का दबाव बढ़ गया है।
उपनल कोर्ट अपडेट: संडे स्पेशल (05 अप्रैल 2026)
सुप्रीम झटका/राहत: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उपनल कर्मचारियों के पक्ष में फैसला बरकरार रखते हुए सरकार की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है।
समान कार्य-समान वेतन: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संविदात्मक स्थिति के बावजूद, समान काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए।
नियमितीकरण का मुद्दा: कोर्ट के फैसले के बाद, सरकार पर नियमितीकरण (Regularization) की प्रक्रिया तेज करने का भारी दबाव है, और उम्मीद है कि जल्द ही नई कट-ऑफ डेट (संभवतः 2022 तक) लागू की जा सकती है।
शासनादेश की प्रतीक्षा: पिछला शासनादेश, जो सत्यापन और अनुबंध के लिए था, उसकी समयसीमा के अनुसार कार्मिक विभाग को तत्काल आदेश जारी करने की आवश्यकता है।
