विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से गुजरने वाला नेशनल हाईवे-309 अब वन्यजीवों के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है. लगातार बढ़ते ट्रैफिक और तेज रफ्तार वाहनों के कारण हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर प्रभावित हो रहे हैं. ताजा मामला रामनगर और रिंगौड़ा के बीच सामने आया है. यहां एक विशालकाय टस्कर हाथी ट्रैफिक के कारण हाईवे पार नहीं कर पाया. जिसके कारण टस्कर हाथी को वापस जंगल में लौटना पड़ा.
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और रामनगर वन प्रभाग के बीच का क्षेत्र हाथियों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हाईवे के एक ओर कॉर्बेट का घना जंगल है, जबकि दूसरी ओर रामनगर वन प्रभाग और कोसी नदी का क्षेत्र पड़ता है. जंगली हाथी अक्सर भोजन और पानी की तलाश में इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं. इसी दौरान एक विशालकाय टस्कर हाथी कॉर्बेट क्षेत्र से निकलकर कोसी नदी की ओर जाने के लिए नेशनल हाईवे-309 के किनारे पहुंचा. हाथी काफी देर तक सड़क पार करने के इंतजार में खड़ा रहा, लेकिन हाईवे पर लगातार दौड़ते वाहनों और भारी ट्रैफिक के कारण वह आगे नहीं बढ़ सका.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाईवे पर वाहनों की तेज रफ्तार और लगातार बजते हॉर्न से हाथी असहज दिखाई दिया. काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब सड़क खाली नहीं हुई तो टस्कर वापस जंगल की ओर लौट गया. वन्यजीव विशेषज्ञ संजय छिम्वाल का कहना है कि यह घटना केवल एक हाथी की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे कॉर्बेट लैंडस्केप में बढ़ते ट्रैफिक दबाव की गंभीर चेतावनी है.
विशेषज्ञ संजय छिम्वाल के मुताबिक हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर पर बढ़ती वाहन आवाजाही भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क हादसों की बड़ी वजह बन सकती है. स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में वाहनों की गति सीमित करने, चेतावनी संकेत लगाने और वन्यजीव क्रॉसिंग जैसी व्यवस्थाओं की सख्त जरूरत है. जिससे जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्ते सुरक्षित रह सकें .
वहीं, मामले में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन बिंदरपाल सिंह ने कहा मौके पर साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं. जिसमें स्पीड लिमिट भी दर्शाई गई है. उन्होंने कहा अगर इन क्षेत्रों में तेज गति में वाहन चलाते हुए संज्ञान में आता है तो कार्रवाई की जाएगी.
