दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद अब उत्तराखंड में भी पर्यटक सीजन को देखते हुए पुलिस और अग्निशमन विभाग दोनों अलर्ट मोड पर आ चुका है. देहरादून के होटल और रेस्टोरेंट में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ ऑडिट की संख्या को भी बढ़ाना शुरू कर दिया है. मई माह में करीब 200 से अधिक ऑडिट किए गए. अग्निशमन अधिकारियों का कहना है कि वह नियमित रूप से संस्थानों में मॉनिटरिंग कर रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के साथ लगातार मीटिंग भी की जा रही है जिसमें उन्हें निर्देश दिए जा रहे हैं कि फायर की एनओसी लेने के बाद भी अपने संस्थान के इंतजामों पर नजर बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है.
दरअसल, दिल्ली में हुए भीषण अग्निकांड के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं को लेकर देहरादून में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. देहरादून में अग्निशमन विभाग ने फायर सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया तेज करते हुए बीते एक महीने में 200 से अधिक संस्थानों का निरीक्षण किया है. वहीं साल 2026 के पहले पांच महीनों में करीब 900 से 1000 भवनों का फायर ऑडिट किया जा चुका है. देहरादून के चीफ फायर ऑफिसर का कहना है कि भीड़ भाड़ वाले बाजारों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जिससे किसी भी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके.
देहरादून मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) अभिनव त्यागी ने दिल्ली की घटना पर दुख जताते हुए कहा कि, इससे सबक लेते हुए उत्तराखंड में फायर सेफ्टी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि हाल ही में देहरादून के प्रमुख रेस्टोरेंट संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें फायर सुरक्षा नियमों और रोजमर्रा की सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि यदि किसी संस्थान, होटल या भवन में फायर सेफ्टी प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल या ऑडिट की आवश्यकता हो तो वे विभाग को आवेदन भेज सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ नियम अनुसार कार्रवाई भी की जाएगी.
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिनव त्यागी ने बताया कि, देहरादून के कई ऐसे बाजार और होटल हैं, जहां बड़ी फायर ब्रिगेड गाड़ियों को पहुंचने में दिक्कत होती है. ऐसे क्षेत्रों के लिए विभाग के पास मिनी हाई प्रेशर फायर वाहन और फायर बाइक्स उपलब्ध हैं, जो शुरुआती स्तर पर आग पर काबू पाने में सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि भवन मालिकों को फायर सेफ्टी उपकरण लगाने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं. जिससे आपात स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके. साथ ही विभाग लगातार फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की समीक्षा भी कर रहा है.
