उत्तराखंड के पौड़ी जिले के पौड़ी विकासखंड के ग्राम सभा धनाऊं मल्ला में विकास कार्यों के लिए सामग्री खरीद और भुगतान को लेकर अनियमितता का मामला सामने आया है. जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम सभा में कराए गए कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री अपनी ही फर्म से खरीदी गई और उसी फर्म को भुगतान भी किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है. मामले का खुलासा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से हुआ.
समीपवर्ती गांव बणगांव मल्ला निवासी जयपाल सिंह ने आरटीआई के जरिए संबंधित दस्तावेज और जानकारी प्राप्त की. दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने जिलाधिकारी गढ़वाल को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति का गठन किया. जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) पौड़ी की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी.
जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ग्राम प्रधान कमल रावत ने 2020 से 2022 के बीच ग्राम सभा के विकास कार्यों में प्रयुक्त सामग्री अपनी ही फर्म से क्रय की और उसी दौरान फर्म को भुगतान भी किया. मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि, जांच में अनियमितता प्रमाणित होने के बाद ग्राम प्रधान और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि, कुल 3 लाख 68 हजार 124 रुपए की धनराशि की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं, जिसमें ग्राम प्रधान और तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी को आधी-आधी राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं.
समाजसेवी जयपाल सिंह ने बताया कि संबंधित ग्राम सभा उनके गांव के निकट स्थित है. जहां ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में अपनी ही फर्म को भुगतान किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है. जयपाल सिंह ने मांग की है कि ग्राम प्रधान के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए.
पौड़ी मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि, ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा कार्यों में अपनी ही फर्म को भुगतान किया जाना पंचायती राज अधिनियम के नियमों के अनुरूप नहीं है. उन्होंने बताया कि कुल ₹3,68,124 की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं. इस राशि का आधा भाग ग्राम प्रधान और शेष आधा तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी से वसूला जाएगा. मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पौड़ी जिले में यदि कोई ग्राम प्रधान या अन्य अधिकारी विकास कार्यों में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
