अपनी 27 सूत्रीय मांगों का निराकरण नहीं होने की सूरत में सोमवार को विभिन्न जिलों से देहरादून पहुंचे डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के सदस्यों ने विशाल रैली निकालते हुए सचिवालय कूच किया. पुलिस ने डिप्लोमा इंजीनियरों को सचिवालय से पहले ही रोक दिया.
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड शासन ने डिप्लोमा इंजीनियर्स की समस्याओं पर अभी तक कोई भी सकारात्मक निर्णय नहीं लिया है, जिसके बाद आज सोमवार 23 फरवरी को उन्हें प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
इस प्रदर्शन में गढ़वाल और कुमाऊं के 4 हजार से अधिक सदस्यों ने भाग लिया. उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रत्येक अभियंता एकजुट है और अंतिम निर्णय तक अपनी मांगों के निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है.
प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि अभियंताओं की सामूहिक आवाज की लगातार अनदेखी की जा रही है, लेकिन प्रत्येक डिप्लोमा इंजीनियर अपनी 27 सूत्रीय मांगों को मनवा कर ही रहेगा. महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि डिप्लोमा इंजीनियर की वर्ष 2006 से चली आ रही वेतन विसंगति का समाधान करते हुए उनका प्रारंभिक ग्रेड पे 4600 किए जाने की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है.
डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के महासचिव वीरेंद्र गोसाईं ने कहा कि वो संवैधानिक व्यवस्था के तहत कर्मचारी संगठन हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है. शासन स्तर पर मांगें मानना तो दूर कोई भी उनकी मांगों को सुनने को भी तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा कि डिप्लोमा इंजीनियरों 10, 16 और 26 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर समय बाद पदोन्नति और उसके अनुसार वेतनमान सुनिश्चित किए जाने की मांग लगातार उठाई जा रही है. इसके अलावा एक जनवरी 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को 10 वर्षों की सेवा पूरी होने पर 5400 का ग्रेड पे का लाभ नहीं दिया जा रहा है.
