उत्तराखंड में शिक्षा विभाग इन दिनों अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ पर शिक्षा निदेशक के साथ मारपीट के आरोपों ने पूरे महकमे को आंदोलित कर दिया है. हालात यह हैं कि यह पहला अवसर है, जब आंदोलन में निदेशक से लेकर संयुक्त निदेशक और खंड शिक्षा अधिकारी तक खुलकर शामिल हुए हैं. खास बात यह है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं संचालित हो रही हैं.
मामले ने तब तूल पकड़ा जब शिक्षा निदेशालय में हुए कथित घटनाक्रम के वीडियो सामने आए. आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने निदेशक के साथ अभद्रता और मारपीट की. इस घटना के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े हजारों मिनिस्टीरियल कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर चले गए हैं.
शिक्षक संगठनों ने ऐलान किया है कि 25 फरवरी से प्रदेश का प्रत्येक कर्मचारी इस कार्य बहिष्कार में शामिल होगा. इसके बाद बड़े आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है. शिक्षकों की मुख्य मांग दो बिंदुओं पर केंद्रित है, पहला विधायक की गिरफ्तारी और दूसरा सार्वजनिक रूप से माफी.
शिक्षा निदेशालय देहरादून में सैकड़ों शिक्षक धरने पर बैठे हैं और लगातार नारेबाजी कर रहे हैं. हालांकि विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है, लेकिन अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है. दूसरी ओर पुलिस ने विधायक के साथ निदेशालय पहुंचकर कथित रूप से मारपीट करने वाले एक हिस्ट्रीशीटर समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इससे शिक्षक संगठनों में यह संदेश गया है कि कार्रवाई चयनात्मक है, जिसे लेकर आक्रोश और बढ़ रहा है.
