कुमाऊं मंडल के सबसे बड़े सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में उपनल कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के विरोध में रोजाना तीन घंटे की कार्य बहिष्कार कर हड़ताल शुरू कर दी है. हड़ताल के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं. करीब 659 उपनल कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिला है.
कर्मचारियों का कहना है कि वे कई बार अस्पताल प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और सरकार तक अपनी मांग रख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 अगस्त तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार छठें दिन भी जारी रहा. उपनल कर्मचारी का कहना है कि पिछले 20 से 25 साल से सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में उपनल के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यही नहीं कोविड काल के दौरान उपनल कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात मरीजों की सेवा की. सरकार उनका पद सृजित नहीं होने का हवाला देखकर वेतन नहीं दे रही है. जिसके चलते घर चलना मुश्किल हो गया है. यहां तक की दुकानदार अब उनको उधार में राशन भी नहीं दे रहे हैं. बच्चों के स्कूलों की कई महीनों की फीस नहीं गई हुई है. जिसके चलते स्कूल प्रशासन बच्चों का भी उत्पीड़न कर रहा है.
अपनी मांगों को लेकर शासन प्रशासन और सरकार से लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन, उनकी सुनाई नहीं हो रही है. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे. वहींं, कर्मचारियों ने बुधवार को मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के कार्यालय भी पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. जिसके बाद कर्मचारी दर्जा राज्यमंत्री शंकर कोरंगा से भी मिलने पहुंचे. जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा. धरना प्रदर्शन में सबसे अधिक महिला कर्मचारी आक्रोशित दिख रही हैं. महिला कर्मचारियों ने अब आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है.
वहीं, मामले में सुशीला तिवारी अस्पताल के प्राचार्य डॉ अरुण जोशी का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर शासन स्तर पर वार्ता चल रही है. जल्द समाधान निकालने की उम्मीद जताई जा रही है.
