उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उपनल संविदा कर्मचारियों और वन विभाग में वर्षों से कार्यरत दैनिक श्रमिकों के नियमितीकरण मामले में सख्त रुख अपनाया है।
अदालत ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए कार्मिक सचिव शैलेश बगोली को 20 अप्रैल को वर्चुअल माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन न होने पर नाराजगी जताई है।
अदालत ने सरकार से पूछा है कि अब तक कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं और आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान उपनल संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि पहले खंडपीठ द्वारा नियमितीकरण के संबंध में आदेश जारी किया जा चुका है, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है और न ही इसे न्यायालय के रिकॉर्ड में प्रस्तुत किया गया है।
संघ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस मामले—(उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनंद बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड)—की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की थी, जिस पर अब न्यायालय सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है।
