उत्तराखंड के सरकारी विभागों में सालों से कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यह सुनवाई उपनल कर्मियों को नियमित करने के आदेश के बाद भी उन्हें नियमित नहीं करने, उन्हें चयनित वेतनमान नहीं देने और दिए गए वेतन से जीएसटी काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर हुई. मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि इनको पहले न्यूनतम वेतनमान दिया जाए. अब मामले की अगली सुनवाई 9 जून को होगी.
आज यानी 29 मई को मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई. आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि इनकी जगह, जो नई नियुक्तियां की जानी है, वो सरकार ने वापस ले लिया है. शर्त ये रखी गई है कि ये अन्य कर्मचारियों की भांति अन्य मांग नहीं करेंगे. सरकार उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने को तैयार है.

संघ की तरफ से ये भी कहा गया कि साल 2013 की नियमावली के तहत सरकार ने स्कंद पुष्प केंद्र में लगे उपनल यानी उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड के कर्मचारियों को नियमित किया था, उसी के आधार पर उन्हें भी नियमित किया जाए. मामले को कैबिनेट में रखने की क्या जरूरत है? दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार से कहा है कि पहले इन्हें न्यूनतम वेतनमान दिया जाए.
बता दें कि उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में एक आदेश जारी किया था, लेकिन इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई फैसला नहीं लिया गया.
न ही इसे नैनीताल हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में लाया गया है. पूर्व में संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ बनाम आनंद बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गई थी.
