नीट-यूजी 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और उसके बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत संदेश जारी करते हुए अपने निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के चार दशकों से अधिक समय शिक्षा, विद्यार्थियों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित किए हैं और हमेशा यह माना है कि मजबूत एवं समावेशी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है।
अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं, उनके सपनों और उनकी न्यायसंगत अपेक्षाओं का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर मिला, जिसके लिए वह आभारी हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना थी। उन्होंने बताया कि इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर समन्वित रूप से कार्य किया। छात्रों, अभिभावकों और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से 21 जून 2026 को पुनः आयोजित परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।
अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के पहले दिन से ही उन्होंने इसकी पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। उनका स्पष्ट संकल्प था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और हर छात्र को न्याय दिलाने के लिए सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी।
इस्तीफे के साथ धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में नई व्यवस्थाओं और तकनीकी सुधारों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं को और अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाया जाएगा, ताकि देश के युवाओं का विश्वास शिक्षा प्रणाली पर और मजबूत हो सके।
