उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 22 हजार से ज्यादा उपनल कर्मचारियों के अनुबंध के संबंध में सरकार ने गुरुवार को आदेश कर दिए। इसके बाद इनका मानदेय सीधे बैंक खातों में जाएगा। हालांकि भविष्य में उपनल कर्मचारी नियमितीकरण का दावा नहीं कर पाएंगे।
कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के संयुक्त सचिव राजेन्द्र सिंह पतियाल ने हाईकोर्ट के निर्देश के तहत विभागीय अनुबंध की शर्तें जारी कर दी हैं। इसके तहत, बीती तीन फरवरी को जारी जीओ के अनुसार, 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके उपनलकर्मियों का विभाग के साथ अनुबंध होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी प्रकृति की होगी। इससे कर्मचारी पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, विभाग जरूरत के अनुसार कर्मचारी का ट्रांसफर या समकक्ष पद पर समायोजन कर सकेगा। कर्मचारियों का मानदेय निर्धारण सैनिक कल्याण विभाग के जीओ के अनुसार होगा। डीए भी दिया जाएगा। सेवा विस्तार का निर्णय अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद तय प्रक्रिया के तहत होगा। अनुबंध के तहत कर्मियों को वर्ष में 12 दिन का आकस्मिक और 15 दिन का उपार्जित अवकाश मिलेगा।
विभागीय अनुबंध के आदेश को उपनल कर्मचारियों ने उनके साथ धोखा करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे नियमितीकरण का रास्ता बंद किया जा रहा है। साथ ही हर साल अनुबंध खत्म होने की आड़ में बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
उपनल कर्मचारी महासंघ की देहरादून में गुरुवार शाम को बैठक हुई। इसमें अनुबंध को लेकर जारी शासनादेश की समीक्षा की गई। अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा कि सभी उपनल कर्मचारी असमंजस में हैं। क्योंकि जो बातें उनके साथ की गई, वह कहीं भी अनुबंध की शर्तों में नजर नहीं आ रही हैं। इस तरह से विभागीय अनुबंध हुआ तो कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात ही खत्म हो जाएगी। उपनल कर्मचारी इस बात को कानूनी तौर पर कहीं भी नहीं उठा सकेंगे।
उन्होंने आशंका जताई कि 11 महीने के अनुबंध को अगले वर्ष के लिए जब दोबारा किया जाएगा तो कई विभाग इसमें टालमटोल कर उपनल से विभागीय अनुबंध पर आए कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा देंगे। उन्होंने कहा कि संघ ने बैठक में इस मामले को रखा है और संशोधित शासनादेश जारी करवाने के लिए वह सैनिक कल्याण मंत्री से मुलाकात करेंगे।
