हाथियों का आबादी वाले इलाकों में पहुंचना कोई नई बात नहीं है. लेकिन हाल के दिनों में यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है. कभी सर्दियों के मौसम तक सीमित रहने वाले ये जंगली हाथी अब साल भर गांवों और कस्बों के बीच देखे जा रहे हैं. हाथियों के आबादी के बीच मौजूदगी के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. वहीं वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर भी यह एक गंभीर मुद्दा बन गया है. हाथियों के लिए ये रास्ते कितने खतरनाक हैं? इसका अंदाजा हरिद्वार में 4 दिनों में 2 हाथियों की मौत से लगाया जा सकता है.
बीते चार दिनों में हरिद्वार जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में दो हाथियों की मौत हुई. इनमें से एक मादा हाथी की मौत खेतों में बिछाई गई करंट वाली तार (फेंसिंग) के चपेट में आने से हुई. जबकि दूसरी मादा हाथी की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. घटनाओं ने वन विभाग को सकते में डाल दिया है. हरिद्वार डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने पुष्टि की कि चार दिनों के भीतर दो हाथियों की मौत बेहद गंभीर मामला है. हमने सभी सैंपल आईवीआरआई बरेली और अन्य लैब में जांच के लिए भेज दिए हैं. एक विशेष टीम गठित की गई है, जो इन दोनों हाथियों के मौतों के वास्तविक कारण का पता लगाएगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों से खेतों की फसलों को बचाने के लिए किसान अक्सर करंट की तारें बिछा देते हैं. यही प्रवृत्ति हाथियों की मौत का सबसे बड़ा कारण बन रही है. वन विभाग ने करंट का जाल लगाने वाले किसान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. विभागीय टीमों ने आसपास के कई क्षेत्रों से अवैध करंट वाली तारों को भी हटाया है. हरिद्वार-राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र हाथियों का घर है. लेकिन बढ़ते शहरीकरण, सड़क और रेलवे लाइनों के विस्तार ने उनके कॉरिडोर को खत्म कर दिया है. अब हाथी जंगल से निकलकर भोजन और पानी की तलाश में गांवों और शहरों का रुख करने लगे हैं.
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर मानते हैं कि मानव-हाथी संघर्ष उत्तराखंड में एक बड़ा संकट बनकर उभर रहा है. हाथी खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं और गुस्से में फसलों को रौंद देते हैं. वहीं लोग अपनी आजीविका बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाते हैं.
वन विभाग लगातार गश्त बढ़ाने हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटा है. हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर और रास्तों को संरक्षित करने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं.
डीएफओ ने कहा हमारा पहला लक्ष्य है कि हाथियों को सुरक्षित रखा जाए. किसी भी सूरत में इनकी मौत को हल्के में नहीं लिया जाएगा. दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी.
