उत्तराखंड सैन्य धाम के निर्माण में तमाम अनियमितताओं का आरोप लगाने वाले एडवोकेट विकेश नेगी ने अब सैन्य धाम का निर्माण कर रही कार्यदायी एजेंसी पेयजल निगम पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने इसकी जानकारी पत्र लिखकर मुख्यमंत्री को भी दी है. विकेश नेगी ने केंद्रीय एजेंसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के आधार पर पेयजल निगम पर कथित तौर पर आरोप लगाए हैं. वहीं, पेयजल निगम की ओर से इस आरोपों को निराधार बताया गया है.
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि पेयजल निगम द्वारा वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 में कराए गए कार्यों का नियमानुसार CAG ऑडिट नहीं कराया गया. ठेकेदारों द्वारा GST की राशि का गबन किया गया, जिसकी वसूली नहीं की गई और सोर्स पर आयकर की कटौती नहीं की गई. इसके साथ ही विभाग द्वारा ठेकेदारों पर कोई पेनल्टी नहीं लगाई गई, न ही देय ब्याज वसूल किया गया.

अनियमितताओं के अन्य आरोप:
- निर्माण कार्यों के लिए अवैध रूप से रॉयल्टी की धनराशि वसूल नहीं की गई.
- ठेकेदारों को बिना बैंक गारंटी के भारी मात्रा में अग्रिम भुगतान कर दिया गया, जिसकी वसूली आज तक नहीं हुई.
- शासनादेशों की घोर अवहेलना करते हुए कार्य करवाए गए और कार्य की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की पाई गई.
- समय पर कार्य पूरे नहीं किए गए, किंतु भुगतान कर दिया गया.
- इन अनियमितताओं से ऐसा प्रतीत होता है कि विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए धनशोधन की गतिविधियां भी की गई होंगी.
- CAG रिपोर्ट समय पर विधानसभा में प्रस्तुत नहीं की गई, न ही उस पर किसी प्रकार की समीक्षा या चर्चा कराई गई.
- शासन ने शिकायत का संज्ञान तो लिया लेकिन शिकायत को निराधार पाया.
संजय सिंह ने कहा कि, जब भी किसी विभाग में CAG ऑडिट करता है तो वह साल के उन महीने को विशेष तौर पर चिन्हित करता है जिस महीने में बजट आया हो या फिर सबसे ज्यादा लेनदेन हुआ हो. उस महीने के हर एक वाउचर को ऑडिट में चेक किया जाता है और इसी तरह से साल के अन्य महीनों में भी रेंडम वाउचर चेक किए जाते हैं. इस तरह से ऑडिट के पहले चरण में ऑडिट अधिकारी द्वारा अपनी रिपोर्ट बनाकर विभाग से कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी जाती है. इन जानकारियों के मिल जाने के बाद अन्य अधिकारी द्वारा दोबारा रिपोर्ट बनाकर, जिन बिंदुओं पर अब भी संतुष्टि वाले जवाब नहीं मिलते हैं, उन बिंदुओं को अलग-अलग कैटेगरी में रखते हैं और उसके बाद शासन स्तर पर CAG के अधिकारी और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों की बैठक होती है.
उस बैठक में इस ऑडिट रिपोर्ट पर समीक्षा की जाती है और इस समीक्षा के बाद भी यदि कोई प्वाइंट बच जाता है या फिर किसी सवाल पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो उसे CAG अपनी रिपोर्ट में ड्राफ्ट कर देता है. वही ड्राफ्ट विधानसभा तक पहुंचता है. उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, यह अधूरी रिपोर्ट है. इन सभी बिंदुओं पर विभाग द्वारा भी उत्तर दिया जा चुका है.
