उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सरकारी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं. कॉलेज प्रबंधन ने न केवल अनुशासन को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का फैसला किया है, बल्कि पीजी हॉस्टल की पूरी व्यवस्था में बदलाव करने की दिशा में भी ठोस पहल शुरू कर दी है.
इसी कड़ी में हॉस्टल के 28 कमरों को नए सिरे से शिफ्ट और पुनर्व्यवस्थित किया जाएगा. ताकि, जूनियर और सीनियर छात्रों के बीच अनावश्यक संपर्क कम हो और रैगिंग जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके. वहीं, मामले में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का कहना है रैगिंग रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे.
दरअसल, हाल ही में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज देहरादून में रैगिंग से जुड़ी कुछ घटनाएं सामने आई थी. जिनमें जूनियर छात्रों ने सीनियरों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे. इन घटनाओं के बाद कॉलेज प्रशासन और एंटी-रैगिंग कमेटी हरकत में आई और मामले की जांच शुरू की.
जांच के दौरान कुछ छात्रों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की गई. इस पूरे घटनाक्रम ने कॉलेज प्रशासन को हॉस्टल व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया. इसी के तहत अब पीजी हॉस्टल में बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं.
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के 2025 बैच के छात्रों ने 2023 बैच के एक सीनियर छात्र पर डराने और धमकाने का आरोप लगाया था. शिकायत में उनका कहना था उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है. जिसकी शिकायत उन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से की थी.
वहीं, दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण में सख्त रुख अपनाते हुए एमबीबीएस के 9 छात्रों को अकादमिक गतिविधियों से 3 महीने के लिए निष्कासित कर दिया गया. इनमें से 2 छात्रों पर 50-50 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाने के साथ ही उन्हें हॉस्टल से भी परमानेंट निष्कासित कर दिया गया.
बता दें कि बीते कुछ सालो में देहरादून, हल्द्वानी, श्रीनगर जैसे मेडिकल कॉलेज के अलावा अन्य कॉलेजों से भी रैगिंग के मामले सामने आएं हैं. कैबिने मंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि देहरादून हो या श्रीनगर या अन्य जगह, दोषी छात्रों को बख्शा नहीं है. जुर्माने के साथ-साथ अन्य कार्रवाई भी की है. आगे भी कुछ नई व्यवस्थाएं इसकी रोकथाम के लिए बनाई जा रही है.
फिलहाल, देहरादून के मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन के उठाए गए कदम को ठोस माना जा रहा है. नई हॉस्टल व्यवस्था और मजबूत निगरानी तंत्र से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में छात्रों को सुरक्षित अनुशासित व सकारात्मक शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा.
