उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन पर हाईकोर्ट ने दिया है फैसला. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एसएलपी को निरस्त करने के मामले में पुनर्विचार याचिका की गई है दाखिल
हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2018 को उपनल के जरिये कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को एक साल के भीतर नियमित करने और न्यूनतम वेतन देने के दिए थे आदेश। सैनिक कल्याण विभाग का तर्क है कि आउटसोर्स अस्थायी व्यवस्था है। इसलिए नियमितीकरण संभव नहीं.
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की नियमितीकरण के खिलाफ एसएलपी खारिज की। साल 2018 में नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा लिया गया उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के पक्ष में लिए गए निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने यथावत रखा। उपनल कर्मियों के प्रति सरकार की उदासीनता को लेकर कर्मचारियों ने विशाल महारैली कर सचिवालय कूच किया। इसके बाद कर्मचारियों को ये आश्वासन दिया गया कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन बावजूद उसके एक बार फिर सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।
